IVF के समय सावधानियाँ: सफल IVF के लिए क्या करें और किन बातों से बचें?
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IVF के समय सावधानियाँ: सफल IVF के लिए क्या करें और किन बातों से बचें?

Table of Contents

    आईवीएफ (IVF - In Vitro Fertilization, शरीर के बाहर निषेचन प्रक्रिया) शुरू करने के बाद लगभग हर दंपत्ति के मन में एक ही सवाल होता है—"क्या हमारी कोई छोटी-सी गलती IVF की सफलता को प्रभावित कर सकती है?" यह चिंता बिल्कुल सामान्य है। कई लोग इंटरनेट, रिश्तेदारों या सोशल मीडिया से अलग-अलग सलाह लेते हैं। समस्या यह है कि हर सलाह हर मरीज पर लागू नहीं होती। कई बार गलत जानकारी इलाज से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

    लेकिन वास्तव में, IVF केवल लैब में होने वाली प्रक्रिया नहीं है। यह दवाओं, हार्मोनल बदलावों, सही समय पर उपचार, संतुलित जीवनशैली और नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग का एक संयोजन है। यदि इनमें से किसी एक हिस्से की भी अनदेखी हो जाए, तो उपचार प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि फर्टिलिटी विशेषज्ञ IVF शुरू होने से पहले ही मरीज को कई जरूरी निर्देश देते हैं।


    अच्छी बात यह है कि अधिकांश सावधानियाँ कठिन नहीं होतीं। समय पर दवा लेना, संतुलित भोजन करना, शरीर को पर्याप्त आराम देना और डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना ही सबसे महत्वपूर्ण कदम होते हैं। सही जानकारी के साथ आप अपने IVF सफर को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बना सकते हैं।

    IVF के दौरान दवाओं और इंजेक्शन का समय क्यों महत्वपूर्ण होता है?

    IVF उपचार के दौरान हार्मोनल इंजेक्शन अंडाशय को नियंत्रित तरीके से उत्तेजित करते हैं ताकि स्वस्थ अंडों का विकास हो सके। इन इंजेक्शनों का पूरा शेड्यूल पहले से तय किया जाता है। क्योंकि प्रत्येक दवा शरीर में निश्चित समय तक सक्रिय रहती है, इसलिए समय में अनावश्यक बदलाव पूरे उपचार की योजना को प्रभावित कर सकता है।

    कई मरीज सोचते हैं कि आधे या एक घंटे की देरी से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन ऐसा हमेशा सही नहीं होता। डॉक्टर इंजेक्शन का समय आपकी रिपोर्ट, हार्मोन स्तर और फॉलिकल्स की ग्रोथ को देखकर तय करते हैं। इसलिए स्वयं समय बदलना या डोज में बदलाव करना उचित नहीं है।

    इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

    • डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर ही इंजेक्शन लगवाएं।

    • समय में आधे या एक घंटे की देरी भी अंडों की गुणवत्ता (Egg Quality – अंडों की विकास क्षमता) को प्रभावित कर सकती है।

    • किसी भी दवा की डोज अपनी मर्जी से कम या ज्यादा न करें।

    • बिना फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट की सलाह के दर्द की दवा, एंटीबायोटिक, सर्दी-खांसी की दवा या कोई हर्बल सप्लीमेंट शुरू न करें।

    • यदि कोई इंजेक्शन छूट जाए, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं अगली डोज लेने का निर्णय न करें।

    याद रखें, IVF में समय केवल सुविधा का विषय नहीं होता। यह उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

    IVF के दौरान क्या खाना चाहिए?

    IVF उपचार के समय आपका शरीर सामान्य दिनों से अलग तरीके से काम करता है। हार्मोनल दवाओं के कारण शरीर को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। इसी दौरान गर्भाशय भी संभावित भ्रूण को स्वीकार करने की तैयारी करता है। इसलिए संतुलित आहार केवल ऊर्जा देने के लिए नहीं, बल्कि पूरे उपचार को सहयोग देने के लिए भी जरूरी होता है।

    बहुत से मरीज इंटरनेट पर मिलने वाले विशेष "IVF डाइट प्लान" अपनाने लगते हैं। लेकिन अधिकतर मामलों में डॉक्टर किसी महंगे या असामान्य भोजन की बजाय संतुलित, ताजा और पोषक आहार लेने की सलाह देते हैं। नियमित भोजन करना और लंबे समय तक भूखे न रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

    अपने भोजन में क्या शामिल करें?

    नियमित रूप से इन चीजों को भोजन का हिस्सा बनाएं:

    • प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, दालें, पनीर और क्विनोआ।

    • हरी पत्तेदार सब्जियां।

    • मौसमी और ताजे फल।

    • सूखे मेवे और बीज।

    • पर्याप्त फाइबर युक्त भोजन।

    क्योंकि यह पोषण गर्भाशय की परत (Endometrium – भ्रूण ठहरने वाली परत) और शरीर की रिकवरी में सहायता करता है।

    किन चीजों से बचना चाहिए?

    उपचार के दौरान इन खाद्य पदार्थों से दूरी रखना बेहतर माना जाता है:

    • प्रोसेस्ड फूड।

    • जंक फूड।

    • अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थ।

    • कच्चा या अधपका भोजन।

    • कच्चे अंडे या सुशी जैसे खाद्य पदार्थ।

    इनसे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, जो IVF के दौरान अनावश्यक जटिलताएं पैदा कर सकता है।

    IVF के दौरान पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है?

    अधिकांश लोग भोजन पर ध्यान देते हैं लेकिन पानी पीने की मात्रा को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि IVF उपचार के दौरान शरीर में पर्याप्त पानी बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है।

    फर्टिलिटी विशेषज्ञ सामान्यतः दिनभर में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी या अन्य तरल पदार्थ लेने की सलाह देते हैं। इसमें नारियल पानी, छाछ और अन्य हेल्दी फ्लूइड शामिल किए जा सकते हैं। यदि आपके डॉक्टर ने किसी विशेष मेडिकल कारण से पानी की मात्रा अलग बताई हो, तो उनकी सलाह को प्राथमिकता दें।

    पर्याप्त हाइड्रेशन शरीर के सामान्य कार्यों को बनाए रखने के साथ-साथ OHSS (Ovarian Hyperstimulation Syndrome – अंडाशय की अत्यधिक सूजन) के खतरे को कम करने में भी मदद करता है। इसलिए प्यास लगने का इंतजार करने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर माना जाता है।

    IVF के दौरान कौन-सी शारीरिक गतिविधियां सुरक्षित हैं?

    IVF शुरू होने के बाद कई महिलाएं यह सोचकर पूरी तरह बिस्तर पर आराम करने लगती हैं कि इससे सफलता की संभावना बढ़ जाएगी। लेकिन दूसरी ओर कुछ लोग अपनी सामान्य जिम या हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज भी जारी रखते हैं। दोनों ही स्थितियां हर मरीज के लिए सही नहीं होतीं।

    क्योंकि हार्मोनल दवाओं के दौरान अंडाशय का आकार सामान्य से बड़ा हो सकता है, इसलिए अत्यधिक शारीरिक दबाव से बचना जरूरी होता है। इसका मतलब यह नहीं कि पूरे दिन निष्क्रिय रहें। हल्की गतिविधियां अधिकांश मामलों में सुरक्षित मानी जाती हैं।

    इन बातों का ध्यान रखें:

    • भारी वजन बिल्कुल न उठाएं।

    • बार-बार सीढ़ियां चढ़ने और उतरने से बचें।

    • पेट पर दबाव डालने वाले घरेलू काम सीमित करें।

    • जिम, रनिंग और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट कुछ समय के लिए रोक दें।

    • नियमित रूप से केवल हल्की वॉक करें।

    हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर में रक्त संचार बनाए रखने में मदद करती है। लेकिन किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज शुरू करने या जारी रखने से पहले अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लेना सबसे सुरक्षित रहता है।

    क्या एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद लंबे समय तक बेड रेस्ट जरूरी होता है?

    एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद सबसे ज्यादा फैलने वाली गलतफहमियों में से एक यह है कि मरीज को कई दिनों या कई हफ्तों तक लगातार बिस्तर पर लेटे रहना चाहिए। लेकिन मेडिकल प्रैक्टिस में ऐसा हर मरीज के लिए जरूरी नहीं माना जाता।

    अधिकांश मामलों में एम्ब्रियो ट्रांसफर (Embryo Transfer – भ्रूण को गर्भाशय में स्थापित करना) के बाद 24 से 48 घंटे का आराम पर्याप्त माना जाता है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामान्य हल्की गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं।

    बहुत अधिक समय तक लगातार बिस्तर पर रहने से अतिरिक्त लाभ मिलने के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं। बल्कि हल्का-फुल्का चलना शरीर में रक्त संचार बनाए रखने में सहायता कर सकता है। फिर भी यदि आपकी मेडिकल स्थिति अलग है, तो हमेशा अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।

    IVF के दौरान किन आदतों से पूरी तरह बचना चाहिए?

    IVF उपचार केवल दवाओं और टेस्ट तक सीमित नहीं होता। आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी उपचार के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। कई बार मरीज दवा तो समय पर लेते हैं, लेकिन धूम्रपान, शराब या अत्यधिक कैफीन जैसी आदतों पर ध्यान नहीं देते। यही छोटी-छोटी बातें उपचार के दौरान अनावश्यक जोखिम बढ़ा सकती हैं।

    क्योंकि प्रजनन क्षमता केवल महिला से जुड़ी नहीं होती, इसलिए डॉक्टर अक्सर पुरुष और महिला दोनों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। यदि दोनों पार्टनर अपनी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, तो उपचार के दौरान शरीर बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया दे सकता है।

    इन आदतों से दूरी बनाएं:

    • धूम्रपान पूरी तरह बंद करें।

    • शराब का सेवन बिल्कुल न करें।

    • कैफीन का सेवन सीमित रखें। सामान्यतः दिन में 1 कप से अधिक चाय या कॉफी लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

    • पर्याप्त और नियमित नींद लें।

    • देर रात तक जागने की आदत से बचें।

    स्वस्थ जीवनशैली केवल IVF के दौरान ही नहीं, बल्कि भविष्य की गर्भावस्था के लिए भी लाभदायक मानी जाती है।

    IVF के दौरान किन केमिकल्स से बचना चाहिए?

    कई लोग यह सोचते हैं कि केवल दवाओं और भोजन का ही IVF पर प्रभाव पड़ता है। लेकिन कुछ रासायनिक पदार्थों के अनावश्यक संपर्क से बचना भी डॉक्टर सलाह देते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि सामान्य घरेलू जीवन पूरी तरह रोक दिया जाए, बल्कि केवल ऐसे उत्पादों का अत्यधिक उपयोग कम करना चाहिए जिनमें तेज रसायन या तीव्र गंध हो।

    विशेष रूप से हार्मोनल उपचार के दौरान शरीर पहले से ही कई बदलावों से गुजर रहा होता है। इसलिए अतिरिक्त रासायनिक संपर्क से बचना एक सावधानीपूर्ण कदम माना जाता है।

    इन चीजों का उपयोग सीमित रखें:

    • तेज महक वाले परफ्यूम।

    • हेयर डाई।

    • केमिकल युक्त नेल पेंट।

    • कीटनाशक।

    • अत्यधिक तेज सफाई वाले केमिकल्स।

    यदि किसी उत्पाद का उपयोग करना आवश्यक हो, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।

    एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद कौन-सी सावधानियाँ सबसे जरूरी हैं?

    एम्ब्रियो ट्रांसफर IVF प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस प्रक्रिया के बाद अधिकांश दंपत्ति बेहद उत्साहित भी होते हैं और चिंतित भी। कई लोग हर छोटी गतिविधि को लेकर डरने लगते हैं। लेकिन वास्तव में इस समय सबसे जरूरी बात घबराना नहीं, बल्कि डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का शांतिपूर्वक पालन करना है।

    एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट होने तक लगभग 14 दिन का समय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान शरीर को सामान्य रूप से काम करने देना चाहिए, लेकिन कुछ सावधानियों का पालन करना आवश्यक होता है।

    1. शारीरिक संबंध बनाने से बचें

    एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद डॉक्टर की अनुमति मिलने तक शारीरिक संबंध न बनाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे गर्भाशय में संकुचन (Uterine Contractions – गर्भाशय का सिकुड़ना) हो सकता है, जो शुरुआती इम्प्लांटेशन के समय अनावश्यक दबाव पैदा कर सकता है। डॉक्टर आपकी स्थिति देखकर सही समय बताते हैं, इसलिए स्वयं निर्णय लेने से बचें।

    2. बहुत गर्म पानी से स्नान न करें

    कई मरीज इस बात को सामान्य समझते हैं, लेकिन IVF के दौरान शरीर का अत्यधिक तापमान बढ़ाना उचित नहीं माना जाता। इनसे बचें:

    • हॉट टब।

    • सौना।

    • स्टीम बाथ।

    • बहुत गर्म पानी से लंबे समय तक स्नान।

    क्योंकि शरीर का तापमान बढ़ने से भ्रूण के इम्प्लांटेशन (Implantation – भ्रूण का गर्भाशय में चिपकना) की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

    3. दवाएं समय पर लेते रहें

    कुछ मरीज एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद यह मान लेते हैं कि अब मुख्य उपचार पूरा हो चुका है। लेकिन ऐसा नहीं है। डॉक्टर द्वारा दी गई प्रोजेस्टेरोन या अन्य दवाएं गर्भाशय को गर्भधारण के लिए तैयार रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए बिना सलाह कोई भी दवा बंद न करें।

    4. तनाव को नियंत्रित रखें

    इंतजार के ये 14 दिन भावनात्मक रूप से कठिन हो सकते हैं। हर छोटी चीज़ को लेकर चिंता करना स्वाभाविक है, लेकिन लगातार तनाव शरीर और मन दोनों को प्रभावित करता है। तनाव कम करने के लिए आप:

    • मेडिटेशन करें।

    • हल्की गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।

    • अच्छी किताब पढ़ें।

    • परिवार के साथ समय बिताएं।

    • पर्याप्त नींद लें।

    क्योंकि तनाव के दौरान कोर्टिसोल (Cortisol – तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ सकता है। इसलिए मानसिक शांति बनाए रखना भी उपचार का हिस्सा माना जाता है।

    IVF के दौरान किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

    हर दर्द या असुविधा गंभीर समस्या का संकेत नहीं होती। हार्मोनल दवाओं के कारण हल्की सूजन, थकान या पेट में भारीपन महसूस होना सामान्य हो सकता है। लेकिन कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज करना उचित नहीं है। यदि आपको इनमें से कोई भी समस्या महसूस हो, तो बिना इंतजार किए अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से संपर्क करें:

    • तेज पेट दर्द।

    • अचानक वजन तेजी से बढ़ना।

    • सांस लेने में तकलीफ।

    • बहुत अधिक पेट फूलना।

    • तेज ब्लीडिंग।

    • लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी।

    क्योंकि ये लक्षण कभी-कभी OHSS (Ovarian Hyperstimulation Syndrome – अंडाशय की अत्यधिक सूजन) जैसी स्थिति का संकेत हो सकते हैं। समय पर उपचार मिलने से जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    Vardaan IVF Center में IVF Treatment क्यों चुनें?

    सही IVF सेंटर चुनना केवल सफलता प्रतिशत देखने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उपचार की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि मरीज की जांच कितनी विस्तार से की जाती है, उपचार की योजना कितनी व्यक्तिगत होती है और पूरे सफर के दौरान मॉनिटरिंग कितनी नियमित रहती है।

    Vardaan IVF Center में प्रत्येक मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, हार्मोन प्रोफाइल, अंडाशय की स्थिति और अन्य फर्टिलिटी फैक्टर्स का विस्तार से मूल्यांकन किया जाता है। क्योंकि हर मरीज की जरूरत अलग होती है, इसलिए उपचार भी उसी आधार पर तैयार किया जाता है। इससे अनावश्यक दवाओं से बचने, सही समय पर निर्णय लेने और उपचार को व्यवस्थित रखने में सहायता मिलती है।

    यदि आप IVF Treatment in Punjab की योजना बना रहे हैं, तो उपचार शुरू करने से पहले अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ से विस्तृत परामर्श लेना आपके लिए सही दिशा तय करने में मदद कर सकता है।

    निष्कर्ष

    IVF के समय सावधानियाँ केवल कुछ नियमों की सूची नहीं हैं। ये ऐसे कदम हैं जो पूरे उपचार को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद करते हैं। दवाओं का सही समय, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, हल्की शारीरिक गतिविधि, तनाव पर नियंत्रण और डॉक्टर के निर्देशों का पालन—ये सभी बातें मिलकर IVF प्रक्रिया को सहयोग देती हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटरनेट या दूसरों के अनुभव के आधार पर अपने उपचार में कोई बदलाव न करें। हर मरीज की मेडिकल स्थिति अलग होती है, इसलिए वही सलाह सही होती है जो आपके फर्टिलिटी विशेषज्ञ ने आपकी रिपोर्ट और स्वास्थ्य को देखकर दी हो।

    यदि आप IVF Treatment in Punjab के लिए विश्वसनीय मार्गदर्शन चाहते हैं या IVF शुरू करने से पहले अपनी फर्टिलिटी की सही जांच करवाना चाहते हैं, तो Vardaan IVF Center के अनुभवी विशेषज्ञों से परामर्श लें। सही समय पर सही सलाह आपके IVF सफर को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और आत्मविश्वास से भरा बना सकती है।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    1. IVF के समय सबसे जरूरी सावधानी क्या होती है?

    IVF के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सावधानी डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और इंजेक्शन का समय बिल्कुल न बदलना है। प्रत्येक इंजेक्शन और दवा एक निश्चित समय के अनुसार दी जाती है ताकि अंडों का विकास सही तरीके से हो सके। इसके साथ संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीना, धूम्रपान और शराब से दूरी रखना तथा सभी फॉलो-अप विजिट समय पर करना भी आवश्यक है। किसी भी दवा को अपनी मर्जी से शुरू या बंद करने के बजाय हमेशा अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

    2. क्या IVF के दौरान सामान्य ऑफिस जा सकते हैं?

    अधिकांश महिलाएं IVF उपचार के शुरुआती चरणों में अपनी सामान्य ऑफिस दिनचर्या जारी रख सकती हैं। लेकिन यह उनकी मेडिकल स्थिति, काम की प्रकृति और उपचार के चरण पर निर्भर करता है। यदि काम में लंबे समय तक खड़े रहना, भारी सामान उठाना या अत्यधिक शारीरिक मेहनत शामिल है, तो डॉक्टर कुछ बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद कुछ दिनों तक आराम करना बेहतर माना जाता है। अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेना हमेशा सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

    3. क्या IVF के दौरान चाय या कॉफी पी सकते हैं?

    हाँ, लेकिन सीमित मात्रा में। सामान्यतः डॉक्टर दिन में एक कप से अधिक चाय या कॉफी न लेने की सलाह देते हैं। अत्यधिक कैफीन का सेवन उपचार के दौरान उचित नहीं माना जाता। यदि आपको पहले से हाई ब्लड प्रेशर, नींद की समस्या या कोई अन्य मेडिकल स्थिति है, तो डॉक्टर कैफीन को और कम करने की सलाह दे सकते हैं। पर्याप्त पानी, नारियल पानी और अन्य स्वस्थ तरल पदार्थों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना अधिक लाभदायक माना जाता है।

    4. एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद कितने दिन आराम करना चाहिए?

    अधिकांश मामलों में एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद 24 से 48 घंटे का आराम पर्याप्त माना जाता है। लगातार कई दिनों या हफ्तों तक बिस्तर पर लेटे रहना हर मरीज के लिए जरूरी नहीं होता। हल्की दैनिक गतिविधियां और छोटी वॉक डॉक्टर की सलाह के अनुसार की जा सकती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि भारी वजन उठाने, कठिन व्यायाम और अत्यधिक शारीरिक मेहनत से बचा जाए। यदि आपकी मेडिकल स्थिति अलग है, तो आपके डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए।

    5. IVF के दौरान किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

    यदि IVF उपचार के दौरान तेज पेट दर्द, अचानक वजन तेजी से बढ़ना, सांस लेने में तकलीफ, बहुत अधिक पेट फूलना, तेज ब्लीडिंग, लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो बिना देरी किए अपने फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए। ये लक्षण कभी-कभी गंभीर जटिलताओं का संकेत हो सकते हैं। स्वयं दवा लेने या अगले अपॉइंटमेंट का इंतजार करने के बजाय तुरंत मेडिकल सलाह लेना अधिक सुरक्षित रहता है, क्योंकि समय पर इलाज से संभावित जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सकता है।




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